कर्ज है तेरे ऊपर मेरे सजदो का.. Hindi sad shayari



बस इतना ही है मुझको तुमसे कहना..
बड़े अच्छे हो तुम, ख्याल रखा करो अपना..!!
कर्ज है तेरे ऊपर मेरे सजदो का..
मैंने एक अरसे से तुझे खुदा माना है..!!

सिर्फ ये सोचकर हमने अपनी आस्तीन नहीं झटकी..
ना जाने कितने सांप और सपोले बेघर हो जाएंगे..



बहुत सीमेंट है साहब आजकल की हवाओं में..
दिल कब पत्थर बन जाता है पता ही नहीं चलता..!!
इससे भी दर्दनाक मंजर क्या होगा वहां..
खंजरों की जगह जुबाने बिक रही हो जहां..!!
खामोशी भी अब रास आ गई है..
ज़िन्दगी इसी बहाने पास आ गई है..!!
सजा बन जाती है गुज़रे वक़्त की निशानियां..
ना जाने मतलब के लिए क्यों मेहरबान होते है लोग..!!


एक ummid मिली थी tumhare आने से अब वो भी टूट गई,
वफादारी की aadat थी हमें अब shayd वो भी छूट गई!


ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत हो जाती है,
जब साथ देने वाला धोकेबाज़ न हो।
स्पर्श वो नहीं जिसमें शरीर को पाया हो..
स्पर्श वो जिसने आत्मा को गले लगाया हो।

क्या कहें हम रखते ही नहीं खबर कौन कैसा है…
कर लेते हैं भरोसा हर एक पर अपना तो दिल ही ऐसा है।
सांसे तो रोक लूं अपनी यह तो मेरे बस में हैं..
यादें कैसे रोकू तेरी तू मेरी नस नस में है।



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