Dard bhari Shayari
1
सपना हैं आँखों में मगर नींद नहीं है;
दिल तो है जिस्म में मगर धड़कन नहीं है;
कैसे बयाँ करें हम अपना हाल-ए-दिल;
जी तो रहें हैं मगर ये ज़िंदगी नहीं है।
2
मोहब्बत मुक़द्दर है एक ख्वाब नहीं;
ये वो अदा है जिसमे सब कामयाब नहीं;
जिन्हें पनाह मिली उन्हें उँगलियों पर गिन लो;
मगर जो फना हुए उनका कोई हिसाब नहीं।
3
ज़िंदगी हमारी यूँ सितम हो गयी;
ख़ुशी ना जाने कहाँ दफ़न हो गयी;
बहुत लिखी खुदा ने लोगों की मोहब्बत;
जब आयी हमारी बारी तो स्याही ही ख़त्म हो गयी।
4
भुला के मुझको अगर तुम भी हो सलामत;
तो भुला के तुझको संभलना मुझे भी आता है;
नहीं है मेरी फितरत में ये आदत वरना;
तेरी तरह बदलना मुझे भी आता है।
5
Jab #प्यार नहीं है तो #भुला क्यों nhi देते;
ख़त किसलिए रखे हैं जला क्यों नहीं देते;
किस वास्ते लिखा है हथेली पे मेरा नाम;
मैं हर्फ़ ग़लत हूँ तो मिटा क्यों नहीं देते।
6
ज़िंदगी से चले हैं अब इल्ज़ाम लेकर;
बहुत जी चुके हैं अब उनका नाम लेकर;
अकेले बातें करेंगे अब वो इन सितारों से;
अब चले जायेंगे उन्हें यह सारा आसमान देकर।
7
#dard ही सही mere #इश्क़ का इनाम तो आया;
खाली ही सही होठों तक जाम तो आया;
मैं हूँ बेवफा सबको बताया उसने;
यूँ ही सही चलो उसके लबों पर मेरा नाम तो आया।
8
दुनिया ने हम पे जब कोई इल्ज़ाम रख दिया;
हमने मुक़ाबिल उसके तेरा नाम रख दिया;
इक ख़ास हद पे आ गई जब तेरी बेरुख़ी;
नाम उसका हमने गर्दिशे-अय्याम रख दिया।
9
समझा न कोई हमारे दिल की बात को;
दर्द दुनिया ने बिना सोचे ही दे दिया;
जो सह गए हर दर्द को हम चुपके से;
तो हमको ही पत्थर दिल कह दिया।
10
आग से सीख लिया हम ने यह करीना भी;
बुझ भी जाना पर बड़ी देर तक सुलगते रहना;
जाने किस उम्र में जाएगी यह आदत अपनी;
रूठना उससे और औरों से उलझते रहना।
11
दस्तूर-ए-उल्फ़त वो निभाते नहीं हैं;
जनाब महफ़िल में आते ही नहीं हैं;
हम सजाते हैं महफ़िल हर शाम;
एक वो हैं जो कभी तशरीफ़ लाते ही नहीं हैं!
12
तुम ने चाहा ही नहीं हालात बदल सकते थे;
तेरे आाँसू मेरी आँखों से निकल सकते थे;
तुम तो ठहरे रहे झील के पानी की तरह;
दरिया बनते तो बहुत दूर निकल सकते थे।
13
मुद्दत से कोई शख्स रुलाने नहीं आया;
जलती हुई आँखों को बुझाने नहीं आया;
जो कहता था कि रहेंगे उम्र भर साथ तेरे;
अब रूठे हैं तो कोई मनाने नहीं आया।
14
ना जाने कौन सी बात पर वो रूठ गयी है;
मेरी सहने की हदें भी अब टूट गयी हैं;
कहती थी जो कि कभी नहीं रूठेगी मुझसे;
आज वो अपनी ही बातें भूल गयी है।
15
मोहब्बत का मेरा यह सफर आख़िरी है;
ये कागज, ये कलम, ये गजल आख़िरी है;
फिर ना मिलेंगे अब तुमसे हम कभी;
क्योंकि तेरे दर्द का अब ये सितम आख़िरी है।
16
उन्हें एहसास हुआ है इश्क़ का हमें रुलाने के बाद;
अब हम पर प्यार आया है दूर चले जाने के बाद;
क्या बताएं किस कदर बेवफ़ा है यह दुनिया;
यहाँ लोग भूल जाते ही किसी को दफनाने के बाद।
17
कहाँ से लाऊँ हुनर उसे मनाने का;
कोई जवाब नहीं था उसके रूठ जाने का;
मोहब्बत में सजा मुझे ही मिलनी थी;
क्योंकि जुर्म मेरा था उनसे दिल लगाने का।
18
वो भूल गए कि उन्हें हसाया किसने था;
जब वो रूठे थे तो मनाया किसने था;
वो कहते हैं वो बहुत अच्छे है शायद;
वो भूल गए कि उन्हें यह बताया किसने था।
19
रास्ते में पत्थरों की कमी नहीं है;
मन में टूटे सपनो की कमी नहीं है;
चाहत है उनको अपना बनाने की मगर;
मगर उनके पास अपनों की कमी नहीं है।
20
ज़ख़्म देने की आदत नहीं हमको;
हम तो आज भी वो एहसास रखते हैं;
बदले बदले से तो आप हैं जनाब;
जो हमारे अलावा सबको याद रखते हैं।
21
मानते हैं सारा जहाँ तेरे साथ होगा;
खुशी का हर लम्हा तेरे पास होगा;
जिस दिन टूट जाएँगी साँसे हमारी;
उस दिन तुझे हमारी कमी का एहसास होगा।
22
कदम कदम पे बहारों ने साथ छोड़ दिया;
पड़ा जब वक़्त तब अपनों ने साथ छोड़ दिया;
खायी थी कसम इन सितारों ने साथ देने की;
सुबह होते देखा तो इन सितारों ने साथ छोड़ दिया।
23
मेरा इल्ज़ाम है तुझ पर कि तू बेवफा था;
दोष तो तेरा था मगर तू हमेशा ही खफा था;
ज़िन्दगी की इस किताब में बयान है तेरी मेरी कहानी;
यादों से सराबोर उसका एक एक सफा था।
24
वक़्त बदलता है ज़िन्दगी के साथ;
ज़िन्दगी बदलती है वक़्त के साथ;
वक़्त नहीं बदलता अपनों के साथ;
बस अपने बदल जाते हैं वक़्त के साथ
25
कभी उसने भी हमें #चाहत का पैगाम लिखा था;
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था;
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