Gila sikwa Shayari

 Gila Sikwa Shayari

Gila Sikwa Shayari
1
​​​दिल की किस्मत बदल न पाएगा​;​
बंधनो से निकल न पाएगा​;​
तुझको दुनिया के साथ चलना है​;​
​तु मेरे साथ चल न पाएगा​।
2
कुछ आँसू होते हैं जो बहते नहीं;
लोग अपने प्यार के बिना रहते नहीं;
हम जानते हैं आपको भी आती है हमारी याद;
पर जाने क्यों आप हमसे कहते नहीं।
3
दिल से दूर जिन्हें हम कर ना सके;
पास भी उन्हें हम कभी पा ना सके;
मिटा दिया प्यार जिसने हमारे दिल से;
हम उनका नाम लिख कर भी मिटा ना सके।
4
​मैंने रब से कहा वो छोड़ के चली गई;
पता नहीं उसकी क्या मजबूरी थी;
रब ने कहा इसमें उसका कोई कसूर नहीं;
यह कहानी तो मैंने लिखी ही अधूरी थी।
5
कितना बेबस है इंसान किस्मत के आगे;
कितना दूर है ख्वाब हकीकत के आगे;
कोई रुकी हुई सी धड़कन से पूछे;
कितना तड़पता है यह दिल मोहब्बत के आगे।
6
तुझे मोहब्बत करना नहीं आता;
मुझे मोहब्बत के सिवा कुछ आता नहीं;
ज़िंदगी गुज़ारने के दो ही तरीके हैं;
एक तुझे नहीं आता, एक मुझे नहीं आता!
7
बड़ी उम्मीद थी उनको अपना बनाने की;
तमन्ना थी उनके हो जाने की;
क्या पता था जिनके हम होना चाहते हैं;
उनको आदत ही नहीं थी किसी को अपना बनाने की!
8
#इंतज़ार की आरज़ू अब खो गई है;
#खामोशियों की आदत हो गई है;
ना शिकवा रहा ना #शिकायत किसी से;
Ager है तो एक #मोहब्बत, joo इन #तन्हाईयों से हो गई है।
9
काश आपकी सूरत इतनी प्यारी ना होती;
काश आपसे मुलाक़ात हमारी ना होती;
सपनो में ही देख लेते हम आपको;
तो आज मिलने की इतनी बेकरारी ना होती!
10
खामोश थे हम तो मगरूर समझ लिया;
चुप हैं हम तो मजबूर समझ लिया;
यही आप की खुशनसीबी है कि हम इतने क़रीब हैं;
फिर भी आप ने दूर समझ लिया!
11
कितना समझाया दिल को कि तु प्यार ना कर;
किसी के लिए खुद को बेक़रार ना कर;
वो तेरे लिए नहीं है नादान;
ऐ पागल किसी और की अमानत का इंतज़ार ना कर!
12
मत बनाना रिश्ता इस जहां में;
बहुत मुश्किल उन्हें निभाना होगा;
हर एक रिश्ता एक नया ग़म देगा;
एक तरफ बेबस तु और एक तरफ हँसता ज़माना होगा।
13
हुस्न भी था, कशिश भी थी;
अंदाज़ भी था, नक़ाब भी था;
हया भी थी, प्यार भी था;
अगर कुछ ना था तो बस इकरार।
14
उन लोगों का क्या हुआ होगा;
जिनको मेरी तरह ग़म ने मारा होगा;
किनारे पर खड़े लोग क्या जाने;
डूबने वाले ने किस-किस को पुकारा होगा।
15
जाने क्यों अकेले रहने को मज़बूर हो गए;
यादों के साये भी हमसे दूर हो गए;
हो गए तन्हा इस महफ़िल में;
कि हमारे अपने भी हमसे दूर हो गए।
16
फूलों को तो बहारों में आना ही था;
खारों को क्यों संग में लाना था;
जिसे चाहा हमने दिल से अपनाया;
क्या उसी को हमसे दूर जाना था।
18
वादा करते तो कोई बात होती;
मुझे ठुकराते तो कोई बात होती;
यूँ ही क्यों छोड़ दिया दामन;
कसूर बतलाते तो कोई बात होती।
19
​मेरी वफाएं सभी लोग जानते हैं;
उसकी जफ़ाएं सभी लोग जानते हैं;
वो ही ना समझ पाए मेरी शायरी;
दिल की सदाएं सभी लोग जानते है।
20
काश वो नगमें हमें सुनाए ना होते;
आज उनको सुनकर ये आंसू ना आए होते;
अगर इस तरह भूल जाना ही था;
तो इतनी गहराई से दिल में समाए ना होते।
21
हर वक़्त का हंसना तुझे बर्बाद ना कर दे;
​तन्हाई के लम्हों में, कभी रो भी लिया कर;
​ए दिल तुझे दुश्मन की भी पहचान कहाँ;
​तु हल्का-ए-याराना में भी मोहतात रहा कर।
22
हकीक़त कहो तो उनको ख्वाब लगता है​;​
शिकायत करो तो उनको मजाक लगता है​;​
कितने सिद्दत से उन्हें याद करते है हम​;​
​और एक वो है​, जिन्हें ये सब इत्तेफाक लगता है​। ​
23
रोती हुई आँखो मे इंतेज़ार होता है​;
​ना चाहते हुए भी प्यार होता है​;​
क्यू देखते है हम वो सपने​;​
जिनके टूटने पर भी उनके सच होने​;​
का इंतेज़ार होता है​।
24
तेरी नज़रों से दूर जाने के लिए तैयार तो थे हम;
फिर इस तरह, नज़रें घुमाने की जरूरत क्या थी;​​
तेरे एक इशारे पे, हम इल्जाम भी अपने सिर ले लेते​;​
फिर बेवजह, झूठे इल्जाम लगाने की जरुरत क्या थी।
25
इंतजार किस पल का किये जाते हो यारों;
प्यासों के पास समंदर नही आने वाला;
लगी है प्यास ​तो ​चलो रेत निचोड़ी जाए​;​
अपने हिस्से में समंदर नहीं आने वाला​।





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