Hindi Shayari, Behtar Hai Muflisi Meri

Hindi Shayari, Behtar Hai Muflisi Meri

कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी,
 चंद सिक्कों की खातिर तूने क्या नहीं खोया है,
माना नहीं है मखमल का बिछौना मेरे पास,
पर तू ये बता कितनी रातें चैन से सोया है।


Hindi Shayari, Behtar Hai Muflisi Meri
उसको रुखसत तो किया था मुझे मालूम न था,
सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला,
इक मुसाफिर के सफर जैसी है सब की दुनिया,
कोई जल्दी में कोई देर से जाने वाला।


यार तो आइना हुआ करते हैं यारों के लिए,
तेरा चेहरा तो अभी तक है नकाबों वाला,
मुझसे होगी नहीं दुनिया ये तिजारत दिल की,
मैं करूँ क्या कि मेरा जहान है ख्वाबों वाला।


Hindi Shayari, Behtar Hai Muflisi Meri
हमारा ज़िक्र भी अब जुर्म हो गया है वहाँ,
दिनों की बात है महफ़िल की आबरू हम थे,
ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर,
जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे।


Hindi Shayari, Behtar Hai Muflisi Meri


दिलों की बंद खिड़की खोलना अब जुर्म जैसा है,
भरी महफिल में सच बोलना अब जुर्म जैसा है,
हर एक ज्यादती को सहन कर लो चुपचाप,
शहर में इस तरह से चीखना जुर्म जैसा है।

Hindi Shayari, Behtar Hai Muflisi Meri


वक्त कहता है कि फिर नहीं आऊंगा,
तेरी आँखों को अब न रुलाऊंगा।
जीना है तो इस पल को जी ले,
शायद मैं कल तक न रुक पाऊंगा।



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