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काफिले राह में कदमों के निशां छोड़ गए
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काश खुशबू की तरह दर्द भी हिजरत करते
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अब तो मुझको भी नदामत है वफा पर अपनी
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मुखतलिफ कितना जमाने से चलन मेरा था!!!
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ए सांस न आ के दिल में है जख्म
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टीस उठती है जब हवा लगती है
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जाने हम सड़क के लोगो से ये महलों वाले क्यूँ जलते है
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जलते हैं इतना तो वो भी सड़कों पे क्यूँ चलते हैं
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#तुम्हारी बेरूखी ने लाज रख ली मैख़ानों की ,
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#तुम आंखों से पिला देते तो पैमाने कहा जाते
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उन्हें भी दास्तां ए हिज्र चुपके से सुना ही दी
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सुकूं ए शाम गम बनकर सितारों की जुबां होकर!!!
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अब मेरी बात समझ में भी नहीं आती क्या खूब
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याद है वो वक्त के हर बात पे जी हां समझे!!!
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ए शमा तुझ पर ये रात भारी है जिस तरह
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मैंने तमाम उमर गुजारी है इस तरह!!!
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तलब ए ख्वाब सबकी आंखों में
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ख्वाब हैरां है कि किधर जाएं!!!
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दोस्तों के नाम का एक ख़त
कमीज़ की जेब में रख कर चलता हूँ..!!
क़रीब से गुज़रने वाले अक्सर पूछते हैं,
इत्र का नाम क्या है…!!
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ना बुज़ुर्गों के ख्वाबों की ताबीर हूँ,
ना मैं जन्नत सी अब कोई तस्वीर हूँ !
जिसको मिलकर के सदियों से लूटा गया,
मैं वो उजडी हुई एक जागीर हूँ !!
हॉं मैं कश्मीर हूँ…..हॉं मैं कश्मीर हूँ
मेरे बच्चे बिलखते रहे भूक से,
ये हुआ है सियासत की इक चूक से !
रोटियॉं मॉंगने पर मिली गोलियॉं,
चुप कराया उनको बंदूक से !
ना कहानी हूँ ना कोई क़िस्सा हूँ मैं,
मेरे भारत तेरा एक हिस्सा हूँ मैं !!
जिसको गाया नहीं जा सका आज तक,
एैसी इक टीस हूँ एैसी इक पीर हूँ !!
हॉं मैं कश्मीर हूँ…..हॉं मैं कश्मीर हूँ
यूँ मेरे हौसले आज़माये गये,
मेरी सॉंसों पे पहरे बिठाये गये !
पूरे भारत में कुछ भी कहीं भी हुआ,
मेरे मासूम बच्चे उठाये गये !
यूँ उजड मेरे सारे घरौंदे गये,
मेरे जज़्बात बूटों से रौंदे गये !!
जिसका हर लफ़्ज़ ऑंसू से लिक्खा गया,
खूँ में डूबी हुई एैसी तहरीर हूँ !!
हॉं मैं कश्मीर हूँ…..हॉं मैं कश्मीर हूँ
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सहारा मांगता है सिर्फ तन्हाई के लम्हों में
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मुहब्बत का ताल्लुक कब किसी से बांधता है वो
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तमन्ना दर्द ए दिल की है तो कर खिदमत फकीरों की
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नहीं मिलता ये गौहर बादशाहों के खजानों में!!!
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गीली लकड़ी की तरह जलने की आदत दे गया
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जाने वाला जाते जाते क्या अमानत दे गया!!!
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पलट सकूं न मैं आगे ही बढ़ सकूं जिस पर
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मुझे ये कौन से रास्ते लगा गया इक शख्स!!!
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लिया जब उसकी निगाहों ने जायजा मेरा
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तो टूट टूट गया खुद से राब्ता मेरा!!!
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तुम ऐसे कौन से खुदा हो कि उम्र भर तुमसे,
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उम्मीद भी न रखूँ और नाउम्मीद भी न रहूँ
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तुम्हारा साथ तसल्ली से चाहिए मुझे,
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जन्मों की थकान, लम्हों में कहाँ उतरती है
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#हर बार हम पर इल्ज़ाम लगा देते हो मोहब्बत का,
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कभी खुद से भी पूछा है इतने हसीन क्यों हो
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आपका चेहरा जो आँखों में आ बसा है
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अब तमाम उम्र मेरी आँखों में चमकता रहेगा
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मेरे सजदे की दुआएँ तुम क्या जानो हमदम
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सर झुका तो तेरी खुशी मांगी हाथ उठे तो तेरी जिंदगी
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तू घड़ी भर के लिए मेरी नज़रो के सामने आ जा
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एक मुद्द्त से मैंने खुद को आईने में नहीं देखा
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थोडा और बताओ ना मुझे मेरे बारे में
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सुना है बहुत अच्छे से जानते हो तुम मुझे
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जो कह दिया वो अल्फ़ाज़ थे,
जो कह न सके वो जज्बात थे,
जो कहते कहते न कह पाये,
वो एहसास थे
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नाम तो लिख दूँ उसका अपनी हर शायरी के साथ,
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मगर फिर ख्याल आता है, मासूम है वो कहीं बदनाम ना हों जाये
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हमे ये दिल हारने की बीमारी ना होती,
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#अगर आपकी दिल जीतने की अदा इतनी प्यारी ना होती।
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खामोशी के भी अपने अल्फाज़ होते हैं
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अगर वो समझ जाते तो आज मेरे करीब होते
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दामन फैलाये बैठे हैं, अलफ़ाज़-ए-दुआ कुछ याद नही
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माँगू तो अब क्या माँगू जब तेरे सिवा कुछ याद नही
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ये भी कड़वा मजाक है, मेरे आजाद मुल्क का
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आजादी की मुबारकबाद अंग्रेजी में देते है लोग
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मेरे दामन में आ गिरो..
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कोई खूबसूरत सी दुआ बनकर
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तू और तेरी यादें दोनों एक से है,
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जितना भुलाना चाहूं उतनी याद आ जाते…
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थके मुद्दतों राह में जिनकी चलकर,
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वो दर तक भी आये न घर से निकलकर
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न जाने अश्क-से आंखों में आये हुए हैं ,
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गुजर गया है जमाना, तुझे भुलाए हुए
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वह अपने दर के फकीरों से पूछते भी नही,
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कि लगाये हुए किसकी आस बैठे हो
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सुना है फिर वह आ रहे हैं, सुनने दास्तां मेरी,
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इलाही आज तो रंगे-असर लाये, जुबाँ मेरी
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भूल ना जाऊ उसे हर नमाज के बाद
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इसलिए मैने उसका नाम दुआ रखा
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और एक सच ये भी है….
अगर हम किसी से दिल से प्यार करने लगते है…..
तो उसके भाव बढ़ जाते है…
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आओ मिलकर खोदे कब्र दिल की,
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कमबख्त बड़ी ख्वाइशे करने लगा है
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घरों पे नाम थे, नामों के साथ ओहदे थे
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बहुत तलाश किया कोई आदमी ना मिला
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जो चल सको तो कोई ऐसी चाल चल जाना,
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मुझे गुमाँ भी ना हो और तुम बदल जाना।।
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वादिए-उल्फत में देखी हमने कब मंजिल की शक्ल,
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गिर पड़े, गिरकर उठे, उठकर संभलते ही रहे
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ढूंढोगे कहाँ मुझको लो मेरा पता ले लो
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एक कब्र नई होगी एक जलता दीया होगा
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हमे बस इतना याद है वो दुवा कौन सी थी
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वो चर्च था मज़ार थी या मन्दिर या ये याद नहीं
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कुछ तो बात है तुझमे जो हम सिर्फ तेरे बारे में सोचते है,
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वरना हम तो ऐसे है जो खुद के बारे में भी सोचा नहीं करते
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तू किसी और के लिये होगा समन्दर,ए- इश्क
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हम तो तेरे साहिल से प्यासे गुज़र जातें हैं
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कोई रूह का तलबगार मिले तो,
हम भी मोहब्बत कर ले…!!
यहाँ दिल तो बहुत मिलते है,
बस कोई दिल से नहीं मिलता…!!
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कौन किसका कितना साथ देता है
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वक़्त सब की औकात बता देता है
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#मत कर कोशिशे मेरे अजीज मेरे दर्द को समझने की
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तू सच बोल फिर चोट खा फिर लिख दवा मेरे दर्द की
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हाल तो पूछ लू तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी,
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ज़ब ज़ब सुनी है कमबख्त मोहब्बत ही हुई है।
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मुझ से रूठकर वो खुश है तो शिकायत ही कैसी,
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अब मैं उनको खुश भी ना देखूं तो हमारी मोहब्बत ही कैसी।
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दिल है ही कहाँ मेरे पास कब्रगाह बन गया है,
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बड़ी ख्वाहिशे दफ़न है इस छोटी सी जगह में !!
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कोई रूह का तलबगार मिले तो
हम भी मोहब्बत कर ले
यहाँ दिल तो बहुत मिलते है,
बस कोई दिल से नहीं मिलता
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छु कर निकलती है जो हवाएँ तेरे चेहरे को।
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सारे शहर का मौसम गुलाबी हो जाता है।
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तुझ पे मरके ही तो
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मुझे जीना आया
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मैं तुमपे अपनी जान भी लुटा दूँ
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तुम मुझ से मुझ जैसी मुहब्बत तो करो
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वादिए-उल्फत में देखी हमने कब मंजिल की शक्ल,
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गिर पड़े, गिरकर उठे, उठकर संभलते ही रहे
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हाय अब इन बस्तियों का जिक्र ही क्या हमनशीं,
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जो अभी बसने न पायी थीं कि वीराँ हो गईं
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जिंदगी कर न सकी इस दर्द का इलाज
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सुकून तब ही मिला जब-जब तुझे याद किया
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हमें मोहब्बत का शौक नहीं था
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वो पास आते गये मोहब्बत होती गई
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मेरी न सही तो, तेरी होनी चाहिए
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तमन्ना किसी एक की तो पूरी होनी चाहिए
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कर लो एक बार तो याद मुझको
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हिचकिया आए जमाना हो गया
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दुनिया मे इश्क़ ही सब कुछ नहीँ हुआ कभी
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दोस्ती भी कुछ अलग मायेने रखती है यारो
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हो बूँद बूँद इश्क़ की और इंतज़ार में जलती लौ
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दोनों अगर मिल जाएँ तो जाने क्या कयामत हो
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उसकी यादों की उल्फ़त से सजी है महफिल मेरी,
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मैं पागल नही हुँ जो उसे भूल कर वीरान हो जाऊ
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कहीं धब्बा न लग जाये तेरी रहमत पर ए ख़ुदा
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हमे भी देख मुद्दत से तेरी इबादत में है
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#तुम्हारी बेरूखी ने लाज रख ली मैख़ानों की ,
~
#तुम आंखों से पिला देते तो पैमाने कहाँ जाते
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काग़ज़ पे तो अदालत चलती है
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हमने तो तेरी आँखो के फैसले मंजूर किये
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दर्द में मुस्कुराने की शिद्दत कितनी भी हो
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पर आँखें बरसना कभी नही भूलती
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सिसकती बालियां, खेतों में धान छोड़ गया
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सुना है भूख़ से दुनिया किसान छोड़ गया…
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वो सलीक़ा हमें जीने का सिखा देती है
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जब कोई चिड़िया चले चोंच में तिनका लेकर
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निकले थे इस आस पे किसी को बना लेंगे अपना
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एक ख्वाहिश ने उम्र भर का मुसाफिर बना दिया
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जीत लू तुझे जमाने की हर ताकत से,
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एक बार जो तू आमीन कह दे मेरी दुआ के बाद !!
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मिल रहे हो न खो रहे हो तुम
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दिन ब दिन बेहद दिलचस्प हो रहे हो तुम
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ख्वाब, ख्याल, मोहब्बत, हक़ीक़त,
आरजू, जुस्तजू, गम, जुदाई, तन्हाई ..
ज़रा सी उम्र मेरी
न जाने किस-किस के साथ गुज़र गयी !
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वो तो दिवानी थी मुझे तन्हां छोड़ गई
खुद न रुकी तो अपना साया छोड़ गई
गम सिर्फ़ इस बात का है
आंखो से करके वादा होंठो से तोड़ गई
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पहाड़ों, लाख रोका होगा तुमने बादलों को…
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लेकिन मुट्ठी में हम भी आसमान रखते हैं…
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इल्ज़ाम तो हर हाल में काँटों पे ही लगेगा,
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ये सोचकर अक्सर फूल भी चुपचाप ज़ख्म दे जातें हैं !
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साँस लेती हैं दीवारें और जान ईंटों में भी होती है
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क्या तुमने कभी किसी घर को, अकेले रोते नहीं देखा?
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ये हुनर सीखा है मैंने वक़्त और हालात से,
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मैं मुकर कर फिर मुकर सकता हूँ अपनी बात से..
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खिड़की के बाहर का मौसम, बादल,बारिश और हवा
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खिड़की के अंदर का मौसम, आंसू, आहें और दुआ
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बारिश की बूँद जैसे फिसल जाती है,
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ऐसे ही जिंदगी भी गुजर जाती है…!
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तुझसे बिछड़ा हूँ तो आज आया मुझे अपना ख्याल
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एक कतरा भी नहीं बाकी कि हों पलकें तो नम
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लफ्ज़, अल्फ़ाज़, कागज़, किताब. सब बेमानी है!
तुम कहते रहो…
हम सुनते रहे बस, इतनी सी कहानी है…!!!
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हजार बार दिल तोड़कर भी मेरा जी नहीं भरा ख़ुदा का,
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हर बार तोड़ते है फिर कहते है बस एक बार और
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हजार बार देखकर भी जी नहीं भरा मेरा,
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हर बार लगता है की बस एक बार और
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जिन लम्हों को लिख नहीं सकता मैं,
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उन्हें सोचकर ही अक्सर खुश हो जाता हूँ
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रोज रोज है हम आज कल तन्हाई में ।
उसकी याद के अँधेरे की गहराई में।
उसको कदर क्यों नही है हमारे प्यार की
ये राज है हमारे दिल की गहराई में.
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मैं अपने दिल से मिटा दूँगा तेरी याद मगर,
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तू अपने ज़ेहन से पहले निकाल दे मुझको
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दमक तो सकते है हम भी गैरों की चमक चुराके,
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मगर उधार की रोशनी का चाँद बनना हमें मंजूर नहीं !!
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शुक्र है खुदा कि आँसुओ का कोई रंग नही होता..!!
वरना सुबह के गीले तकिये से रात के
कई राज खुल जाते..!!
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कहाँ से इब्तिदा कीजे बड़ी मुश्किल है,
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कहानी इश्क़ की है और मजमा रात भर का है
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अपनी ज़बान से किसी की बुराई मत करो क्यूँकि
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बुराईयाँ तुममें भी हैं और ज़बान दूसरों के पास भी है
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मैं दरख़्त हूं, हर रोज़ गिरते हैं पत्ते मेरे
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फिर भी हवाओं से बदलते नहीं रिश्ते मेरे
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तू नहीं तेरे अंदर बैठे रब से, मोहब्बत है मुझे
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तू तो बस एक जरिया है, मेरी इबादत का
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कुछ आपका अंदाज है कुछ मौसम रंगीन है
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तारीफ करूँ या चुप रहूँ जुर्म दोनो संगीन है
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दिल में तेरी यादें लिए, हाथों में तेरी छुअन के निशां रह गए,
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बाद मौत के मिलेंगे कागज़ पे, अधूरे जो मेरे अरमां रह गए।
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रिश्ते तोड़ देने से मुहब्बत ‘ख़तम नहीं होती ।।
उनसे कहना…
लोग याद तो उन्हें भी करते है जो दुनिया ‘छोड़ देते है
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बड़ी हाय तौबा के दिन थे
जो इश्क़ की शुरुवाती के दिन थे
रफ़्ता रफ़्ता सब खामोश होता गया
तुम भी, मैं भी,और अब तो ,इश्क़ भी
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किसी ने कहा बिखरे बिखरे से हो तुम
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मैंने कहा ख़ुशबू हूँ ये रवायत है मेरी
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उम्मीद तो है हश्र में इन्साफ़ की लेकिन
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अल्लाह हसीनों का तरफ़दार न हो जाये
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सहारे ढूँढने की आदत नहीं हमारी,
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हम अकेले ही पूरी महफ़िल के बराबर है

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