Hindi urdu shayari | हिंदी उर्दू शायरी इन हिंदी


Hindi urdu  shayari | हिंदी उर्दू शायरी इन हिंदी________________
1
सुना है फिर वह आ रहे हैं, सुनने दास्तां मेरी,
~
इलाही आज तो रंगे-असर लाये, जुबाँ मेरी।
-‘अलम’ मुजफ्फरनगरी
1.इलाही – हे ईश्वर
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2
सौ बार तेरा दामन हाथों में मेरे आया,
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जब आंख खुली, देखा, आपना ही गिरेबाँ है।
-असगर गोण्डवी
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3
#हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पै दम निकले,
#बहुत निकले मेरे अरमाँ लेकिन फिर भी कम निकले।
#निकलना खुल्द से आदम का सुनते आये थे
लेकिन,बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले।
-मिर्जा गालिब
1.खुल्द-स्वर्ग,जन्नत 2.बेआबरू- अपमानित, तिरस्कृत 3.कूचा – गली
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4
हर इक बात पै कहते हो तुम कि तू क्या है,
~
तुम्हीं कहो कि यह अंदाजे-गुफ्तगू क्या है?
-मिर्जा ‘गालिब’
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5
वादा करके और भी आफत में डाला आपने,
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जिन्दगी मुश्किल थी, अब मरना भी मुश्किल हो गया।
-जलील मानिकपुरी
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6
शिकायत जुल्मे-खजंर का नहीं गम है तो इतना है,
~
जबाने-गैर से क्यों मौत का पैगाम आया है?
-‘साकिब’ लखनवी
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7
सब्र करना सख्त मुश्किल है, तड़पना सहल है,
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अपने बस का काम कर लेता हूं, आसां देखकर।
-यास और यगाना चंगेजी
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8
साजे-उल्फत छिड़ रहा था आसुंओं के तार पर,
~
मुस्कराये हम तो उनको बदगुमानी हो गई।
-शकील बदायुनी
1.साजे-उल्फत – मुहब्बत का साज (बाजा, वाद्य)
2. बदगुमानी – किसी की ओर से बुरा खयाल, कुधारणा
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9
वह नादिम हुए कत्ल करने के बाद,
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मिली जिन्दगी मुझको मरने के बाद।
-‘नूह’ नारवी
1.नादिम – लज्जित, शर्मिन्दा, पछतानेवाला
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10
वहाँ जवाब की जहमत उठा रही है खिरद,
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जहाँ सवाल खुद अपना जवाब होता है।
-अब्दुल हमीद अदम
1.जहमत – कष्ट, क्लेश, तकलीफ 2.खिरद – अक्ल, बुद्धि
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11
वही रंगे – तगाफुल है, वही नाजे – तगाफुल है,
~
न जज्बे-शौक काम आया, न तर्के-शौक का आया।
-‘रविश’ सिद्दकी
1.रंगे–तगाफुल – उपेक्षा या बेतवज्जुही के अन्दाज
2. नाजे–तगाफुल – उपेक्षा या बेतवज्जुही के हाव-भाव
3.जज्ब – आकर्षण, कशिश 4.शौक – चाहत, अभिलाषा, उत्कंठा
5.तर्के-शौक – चाहत या अभिलाषा का त्याग
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12
वाँ वह गरूरे-इज्जो-नाज, यां यह हिजाबे-पासे-वज्अ,
~
राह में हम मिले कहाँ, बज्म में वह बुलाये क्यों?
-मिर्जा गालिब
1. इज्ज- बेबसी, असमर्थता या नम्रता, विनीति
2.नाज – (i) मान, अभिमान (ii) नाजोअदा 3.हिजाब – आड़, ओट, पर्दा
4. पास – लिहाज, संकोच, शील 5.वज्अ – शैली, ढंग
6. बज्म – महफिल
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13
वह अपनी खू न छोड़ेंगे, हम अपनी वज्अ क्यों बदलें,
~
सुबकसर बन के क्या पूछें कि हम से सरगराँ क्यों हो।
-मिर्जा गालिब
1.खू – आदत, स्वभाव 2.वज्अ – शैली, ढंग
3. सुबकसर – सर नीचे करके, सर झुका कर
4.सरगराँ – नाराज, नाखुश, अप्रसन्न
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14
वह अपने दर के फकीरों से पूछते भी नही,
~
कि लगाये हुए किसकी आस बैठे हो।
-तअश्शुक
1. दर – दरवाज, द्वार
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15
वह मेरे सामने बैठे हुए हैं,
~
मगर यह फासिला भी कम नहीं।
-बाकी सिद्दीकी
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16
मौत फिर जीस्त न बन जाये, यह डर है’गालिब’,
~
वह मेरी कब्र पर अंगुश्त -– बदंदाँ होंगे।
-मिर्जा गालिब
1.जीस्त – जिन्दगी, जीवन 2.अंगुश्त – बदंदाँ – जो अचंभे के कारण दाँतों में उँगली दबाकर रह गया हो, निस्तब्ध,
चकित (अर्थात् मेरी मृत्यु पर उन्हें अफसोस
होगा और वह मेरी कब्र पर आयेंगे।
मुझे डर है कि उसके आने से मृत्यु जीवन
न बन जाए और उन्हें मुंह में उँगली देनी पड़े)
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17
यह तो नहीं कहता कि इन्साफ ही करो,
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झूठी भी तसल्ली हो तो जीता ही रहूँगा।
-सौदा
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18
वक्ते-पीरी दोस्तों की बेरूखी का क्या गिला,
~
बच के चलता है हर इक गिरती हुई दीवार से।
1.वक्ते-पीरी – बुढ़ापे के समय
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19
मुझसे बरगश्ता न होते तो तअज्जुब होता,
~
आप को उज्रे-तगाफुल की जरूरत क्या है।
-हसरत मोहानी
1.बरगश्ता – नाराज 2.उज्र – विवशता, मजबूरी
3. तगाफुल – उपेक्षा, बेतवज्जुही, बेपर्बाई
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20
मेरा अज्म इतना बुलन्द है
कि पराये शोलों का डर नहीं,
मुझे खौफ आतिशे-गुल से है,
कहीं ये चमन को जला न दे।
-शकील बदायुनी
1.अज्म – साहस, हिम्मत 2. आतिशे-गुल- (चमन के) फूलों की आग
(यानी अपनों से)
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21
मैं परीशाँ था, परीशाँ हूँ, नई बात नहीं,
~
आज वो भी है परीशान, खुदा खैर करे।
-उमर अंसारी
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22
बस इतनी दाद देना बाद मेरे मेरी उल्फत की,
~
कि याद आऊँ तो अपने आपको प्यार कर लेना।
-ताजवर नजीमाबादी
1.उल्फत – प्यार, मुहब्बत
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23
बाकी है लहू दिल में तो हर अश्क से पैदा,
रंगे – लबो- रूखसारे – सनम करते रहेंगे।
इक तर्जे -तगांफुल है सो उनको मुबारक,
इक अर्जे – तमन्ना है सो हम करते रहेंगे।
-फैज अहमद फैज
1. लब – ओष्ठ, होंठ 2.रूखसार – गाल, कपोल
3. सनम – महबूबा, माशूक
4.तर्जे –तगांफुल – उपेक्षा या बेतवज्जुही के अंदाज
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24
बेगानावार ऐसे वो गुजरे करीब से,
~
जैसे कि उनको मुझसे कोई वास्ता न था।
-अजहर कादिरी
1.बेगानावार – बेगानों की तरह
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25
बैठें तो किस उम्मीद पर बैठे रहे यहाँ,
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उठे तो उठ के जायें कहाँ तेरे दर से हम।
– बिस्मिल हाशमी
1 दर – दरवाजा, आस्तां
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26
नहीं मिलते तो इक अदना शिकायत है न मिलने की,
~
मगर मिलकर न मिलने की शिकायत और होती है।
-वामिक जौनपुरी
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28
पास रहकर यह तकल्लुफ, साथ रहकर यह हिजाब,
~
मेरा उनका फासिला गोया कई मंजिल का है।
-‘दिल’ शाहजहाँपुरी
1.हिजाब – पर्दा 2.गोया – मानो, जैसे
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29
फिर गये आप मेरे कूचे से,
~
दो कदम पै गरीबखाना था।
-असर अजीमाबादी
1.कूचे – गली
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30
देखे हैं इतने ख्वाब कि अब अपने रू-ब-रू,
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उनको भी देख लूँ तो समझता हूँ ख्वाब है।
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31
दैर में या हरम में गुजरेगी,
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उम्र तेरे ही गम में गुजरेगी।
-फानी बदायुनी
1.दैर – मुर्तिगृह, बुतखाना 2.हरम – काबा, खुदा का घर
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32
न जाने अश्क-से आंखों में आये हुए हैं ,
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गुजर गया है जमाना, तुझे भुलाए हुए।
-फिराक गोरखपुरी
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33
न जाने किधर जा रही है यह दुनिया,
~
किसी का यहाँ कोई हमदम नहीं है।
-‘असर’ लखनवी
1हमदम – हर समय का साथी, दोस्त, मित्र।
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34
तेरे सवाल पै चुप हैं, इसे गनीमत जान,
~
कहीं जवाब न दे दें कि मैं नहीं सुनता।
-मिर्जा गालिब
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35
थके मुद्दतों राह में जिनकी चलकर,
~
वो दर तक भी आये न घर से निकलकर।
-अमीर मीनाई
1. दर- दहलीज, दरवाजा, द्वार
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36
दिल में कमी कुछ ऐसी महसूस हो रही है,
~
नजदीक आके जैसे बहुत दूर हो गये है।
-अब्दुल हमीद अदम
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37
दिले-नादाँ तुझे हुआ क्या है, आखिर इस दर्द की दवा क्या है,
हम हैं मुश्ताक और वो बेजार या इलाही ये माजरा क्या है?
हम भी मुंह में जुबान रखते हैं, काश पूछो कि मुद्दआ क्या है,
#हमको उनसे वफा की है उम्मीद जो नहीं जानते वफा क्या है
जान तुम पर निसार करता हूँ, मैं नहीं जानता दुआ क्या है?
-मिर्जा गालिब
1.मुश्ताक – अभिलाषी, ख्वाहिशमंद 2.बेजार- (i) विमुख, मुंह फेरे हुए (ii) क्रुद्ध, अप्रसन्न, नाखुश 3.इलाही – हे खुदा
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38
तेरी उम्मीद पै जीने से हासिल कुछ नहीं लेकिन,
~
मगर यूँ भी न दिल को आसरा देते तो क्या करते
-जज्बी
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39
तेरे करीब रहके भी दिल मुतमइन न था,
~
गुजरी है मुझपै यह भी कयामत कभी-कभी।
-नासिर काजिमी
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40
तेरे कूचे में सब पर  फूल  बरसे,
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मगर हम एक पत्थर को भी तरसे।
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42
तुम ऐसे कौन से खुदा हो कि उम्र भर तुमसे
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उम्मीद भी न रखूँ और नाउम्मीद भी न रहूँ।
-ख्वाजा हाली
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44
#तुमको खबर न हुई और जलके खाक हुआ,
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वह दिल जो तेरी मुहब्बत का आशियाना था।
-रविश सिद्दकी
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46
जमाना बड़े गौर से सुन रहा था,
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हमीं सो गये, दास्तां कहते -कहते।
-‘साकिब’ लखनवी
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47
जो नजर की इल्तिजा समझा नहीं,
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हाथ उसके सामने फैलायें क्या?
-‘शातिर’ हाकिमी
1. इल्तिजा – प्रार्थना, दरखास्त
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48
झूठे वादे भी नहीं करते आप,
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कोई जीने का सहारा भी नहीं।
-जलील मानिकपुरी
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49
तअम्मुल तो था उनके आने में कासिद,
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मगर यह बता तर्जे-इन्कार क्या थी।
-मोहम्मद इकबाल
1.तअम्मुल-संकोच, असमंजस, पसोपेश  2.कासिद – डाकिया
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50
खयाल तक न किया अहले-अंजुमन ने कभी,
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तमाम रात जली शमअ अंजुमन के लिए।
-वहशत कलकतवी
1.अहले-अंजुमन – महफिल वालों
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51
‘गालिब’ तेरा अहवाल सुना देंगे हम उनको,
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वह सुन के बुलाले, यह इजारा नहीं करता।
-मिर्जा गालिब
1.अहवाल – समाचार, हाल 2.इजारा – यानी प्रतिज्ञा या वादा
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52
गिरा देंगे नजरों से अपनी वह मुझको,
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निगाहों में उनकी समाकर करूँ क्या?
-बहजाव लखनवी
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53
गुल से भी नाजुक बदन उसका है लेकिन दोस्तों,
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यह गजब क्या है कि दिल पहलू में पत्थर का बना है।
-बहादुशाह ‘जफर’
1. पहलू – पार्श्व, बगल
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54
कितने नादिम हैं, वह खुद वादा-फरामोशी पर,
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अब बुलाते भी नहीं शर्म के मारे मुझको।
1.नादिम – शर्मिंदा, लज्जित 2.फरामोशी – भूलना
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55
किस-किस तरह से किया अपना जी निसार,
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लेकिन न गई दिल से तेरी बदगुमानियाँ।
-हसरत मोहानी
1.बदगुमानियाँ –  कुधारणाएं , गलतफहमियां
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56
कुछ तो मिल जाये लबे-शीरीं से,
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जहर खाने की इजाजत ही सही।
-अनवर मिर्जापुरी
1.लबे-शीरीं – मीठे लब
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57
कोई कह दे कि क्या इलाज करूँ,
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दर्द-ए-दिल में कमी नहीं होती।
-साजन पेशावरी
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58
कहीं मर न जाये सितम सहने वाले,
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तगाफुल में थोड़ी-सी तख्फीफ फर्मायें।
-अब्दुल हमीद ‘अदम’
1.तगाफुल – उपेक्षा, बेतवज्जुही 2.तख्फीफ – कमी
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59
काबा किधर है शुक्र का सिज्दा अदा करूँ,
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अल्लाह आप आये हैं मेरे मकान पर।
-साकिब लखनवी
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60
कहीं धब्बा न लग जाये तेरी बन्दानवाजी पर,
~
#हमें भी देख मुद्दत से तेरी महफिल में रहते हैं।
-आजाद बारानवी
1.बन्दानवाजी – अपने चाहने वालों पर इनायत,
अपने सेवकों और भक्तों पर कृपादृष्टि
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61
काटा गया न कुर्बते-पैहम के बावजूद,
~
वह फासिला जो देखने में फासिला न था।
-साहिर नौबहार मडरिया
1.कुर्बते-पैहम – लगातार पास होना
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62
कभी यक-ब-यक तवज्जुह,कभी दफ्अतन तगाफुल,
~
मुझे आजमा रहा है कोई रूख बदल -बदल कर।
-शकील बदायुनी
1.तवज्जुह – (i) किसी की ओर मुंह करना, ध्यान देना, ध्यान
(ii) कृपा, दया, मेहरबानी 2.दफ्अतन – अचानक
3.तगाफुल – उपेक्षा, ध्यान न देना, बेतवज्जुही
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63
करने गये थे उनसे तगाफुल का हम गिला,
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की एक ही निगाह कि हम खाक हो गये।
-मिर्जा गालिब
1.तगाफुल – उपेक्षा, ध्यान न देना, बेतवज्जुही
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64
कहने को यूँ जहाँ में हजारों हैं यार-दोस्त,
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मुश्किल के वक्त एक है, परवरदिगार दोस्त।
-असीर
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66
ऐ सितमगर मेरे इस हौसले की दाद दे,
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सामने तेरे अगर फरियाद कर लेता हूँ मैं।
-अर्श मल्सियानी
1. सितमगर – जुल्म ढानेवाला 2.फरियाद – (i) शिकायत, परिवाद (ii) न्याय-याचना (iii) सहायता के लिए पुकार, दुहाई
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67
ऐसा न हो यह दर्द बने दर्द-ए-लादवा,
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ऐसा न हो तुम भी मुदावा न कर सको।
-गुलाम मुस्तफा तबस्सुम
1.लादवा – लाइलाज 2.मुदावा – इलाज, दवा, उपचार
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  68
कब मैं कहता हूँ तेरा गुनहगार न था,
~
लेकिन इतनी तो अकूबत का सजावार न था।
-काइम
1. अकूबत – सख्ती, कड़ाई
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69
कभी किसी को यह खयाल आ ही जायेगा इसका,
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कि हमको खो के, किसी ने कुछ गवांया है।
-अब्दुल हमीद अदम
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70
उधर वह बदगुमानी है, इधर यह नातवानी है
~
न पूछा जाये है उससे, न बोला जाये है हमसे।
-मिर्जा ‘गालिब’
1.बदगुमानी – किसी की ओर से बुरा खयाल, कुधारणा
2. नातवानी – शक्तिहीनता, निर्बलता, कमजोरी
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71
उम्मीद तो बँध जाती, तस्कीन तो हो जाती,
~
वादा न वफा करते, वादा तो किया होता।
1.तस्कीन -(i) संतोष, इत्मीनान (ii) सान्त्वना, ढाढ़स, दिलासा
2.वफा – निर्वाह, निबाह, प्रतिज्ञा पालन
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72
ऐ चश्मे – यार, न तगाफुल, न इल्तिफात,
~
क्या मैं किसी सुलूक के काबिल नहीं रहा।
-अब्दुल हमी अदम
1.चश्मे–यार– यार, प्रेमी, प्रेमिका 2.तगाफुल – उपेक्षा, बेपर्वाई, अनदेखी 3.इल्तिफात – (i) तवज्जुह, प्रणय-कटाक्ष लगाव, प्रवृति (ii) दया, कृपा
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73
ऐ हासिले-खुलूस बता क्या जवाब दूँ,
~
दुनिया यह पूछती है कि मैं क्यों उदास हूँ।
-नाजिश प्रतापगढ़ी
1.हासिले-खुलूस – मुहब्बत का निचोड़
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