My Two Word Love story | Love Shayari| mordenlove.online


My Two Word Love story | Love Shayari| mordenlove.online

तूम बस इतना ही अच्छा हो कि मुझे अच्छा लगे
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इतना भी क्या अच्छा होना कि सबको अच्छा लगे
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कैसे करूँ तुम्हारी में यादों की गिनती,
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कोई साँसों का हिसाब रखता है क्या…
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कदम कदम पर बदल रहे हैं मुसाफिरों की तलब के रास्ते
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हवाओं जैसी मुहब्बतें हैं सदाओं जैसी रफाक्ते हैं!!!
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जानेमन तुझको डराया है किसी वहमी ने
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खो दिया इस मुहब्बत को गलतफहमी में!!!
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बरबाद ए तमन्ना पर आताब और ज्यादा
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हां मेरी मुहब्बत का जवाब और ज्यादा!!!
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अपनी पीठ से निकले खंजरों को गिना जब मैंने
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ठीक उतने ही थे जितनों को गले लगाया था मैंने
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तासीर किसी भी दर्द की मीठी नहीं होती,
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वजह यही है कि आँसू भी नमकीन होते हैं….
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वो करते हैं बात इश्क़ की, पर इश्क़ के दर्द का उन्हें एहसास नहीं,
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इश्क़ वो चाँद है जो दिखता तो है सबको, पर उसे पाना सब के बस की बात नही….
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मैं फिर से निकलूँगा तलाशने को मेरी जिंदगी में खुशियाँ यारो,
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दुआ करना इस बार किसी से मोहब्बत न हो….
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साँस लेती हैं दीवारें … और जान ईंटों में भी होती है …
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क्या तुमने कभी किसी घर को, अकेले रोते नहीं देखा …?
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सारे जहाँ की धूप मेरे सर पे आ पड़ी,
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मुझ पर किसी दरख़्त का साया था, कट गया
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मंज़िलों  की  बात  छोड़ो ,  किस  ने  पाईं  मंज़िलें,
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एक सफ़र अच्छा लगा, एक हमसफ़र अच्छा लगा
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तुम्हें मुझ तक मुझे तुम तक पहुँचाने के
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ख़ूबसूरत एहसास का नाम है शायरी
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हर रोज एंजॉय का ग्राफ बढ़ाओ
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एन्जियोग्राफी जीवन में नही करानी पड़ेगी
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सुविचारों का असर इसलिए नहीं होता, क्योंकि लिखने और पढ़ने वाले दोनों यह समझते है कि ये दूसरों के लिए है !
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माफ़ी वही दे सकता है जो अंदर से मज़बूत हो.
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#खोखले इंसान सिर्फ बदले की आग में जलते रहते ह
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आओ मिलकर खोदे कब्र दिल की
कमबख्त बड़ी ख्वाइशे करने लगा है
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कोई होंठों पर ऊँगली रख गया
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उस दिन से मैं लिख कर बोलता हूँ
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प्यार मे कितनी बाधा देखी
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फिर भी कृष्ण के साथ राधा देखी
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मेरी हिम्मत को परखने की गुस्ताख़ी न करना
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#पहले भी कई तूफ़ानों का रुख़ मोड़ चूका हूँ
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बहुत खूबसूरत होती है एकतरफ़ा मोहब्बत
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ना कोई शिकायत होती है और न कोई बेवफ़ाई
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जाने ऐसी भी क्या दिल लगी थी तुम से,
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आख़री ख़्वाहिश में भी तुम्हारी मोहब्बत मांगी
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जाने ऐसी भी क्या दिल लगी थी तुम से,
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आख़री ख़्वाहिश में भी तुम्हारी मोहब्बत मांगी
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मत खोल मेरी किस्मत की किताब को
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हर उस शख़्स ने दिल दुखाया जिस पे नाज़ था
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क्यूँ उदास बैठे हो इस तरह अँधेरे में
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दुख कम नहीं होता रौशनी बुझाने से
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मेरी हँसी में भी ग़म छिपे हैं
डरता हूँ बताने से….
कहीं सबका प्यार से भरोसा न उठ जाये
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तुम अगर साथ आ गये होते
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ज़िंदगी हर तरह से मुमकिन थी
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होने लगा है हिसाब नफे और नुकसान का
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मासूम सी मोहब्बत व्यापार हो गई
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उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नही है
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ये दिल उसका है अपना होता तो बात और होती
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बेवफ़ाई का दुःख नहीं है मुझे
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बस कुछ लोग ऐसे थे जिन से उम्मीद बहुत थी
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कितनी दिलकश है उसकी ख़ामोशी
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सारी बातें फ़िज़ूल हों जैसे
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जुदाई पर ही क़ायम हैं निज़ाम-ऐ-ज़िंदगी भी
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बिछड़ जाता है साहिल से गले मिल कर पानी भी
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इस तरह भी ना याद आया कर मुझे
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इतने आँसूं नहीं हैं मेरे पास
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काश के बचपन में ही तुझे मांग लेते
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हर चीज़ तो मिल जाती थी दो आँसू बहाने के बाद
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कितने आँसू बहा दिये चार दिन की मोहब्बत में
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अगर सज़दे में बहते तो आज गुनहगार ना होते
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जी भरके रोते हैं तो क़रार मिलता है
इस जहान में कहाँ सबको प्यार मिलता है
ज़िंदगी गुज़र जाती है इम्तिहानों के दौर से
एक जख़्म भरता है तो दूसरा तैयार मिलता है
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याद नहीं वो रूठी थी या मैं रूठा था
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बस साथ हमारा ज़रा सी बात पर छूटा था
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थक गया हूँ तेरी नौटँकी से ऐ ज़िंदगी
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मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे
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तेरे बिना जीना मुश्किल है
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ये तुझे बताना और भी मुश्किल है
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सब छोड़ जा रहे हैं आजकल तन्हा हमे जब
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ए ज़िंदगी तुझे भी इजाज़त है जा ऐश कर
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मैं शिक़ायत करूँ तो क्यों करूँ ये तो किस्मत की बात है
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तेरी सोंच में भी नहीं मैं और तू मुझे लफ़्ज़ लफ़्ज़ याद है
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बस एक लफ़्ज़ उनको सुनाने के लिये
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जाने कितने अल्फ़ाज़ लिखे हमने जमाने के लिये
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मुश्किल हालात से कह दो आज हमसे ना उलझे
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दुवाओं से हाथ भरे हैं मेरे तुम्हें कहाँ सम्भाल पाउँगा
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बड़ी ही वक़्त की पाबन्द है तकलीफ़ें मेरी
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कुछ वक़्त गुज़रता नहीं कि फिर से चली आती है
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ना तो अनपढ़ रहे ना क़ाबिल हुवे
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खामखाँ ए इश्क़ तेरे स्कूल में दाख़िल हुवे
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तू कल की तरह आज नहीं साथ मेरे तो क्या हुआ,
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कैसे बताऊँ तुझे कि मोहब्बत तो हम तेरी दूरियों से भी करते हैं
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तुमने जो मेरे दिल को छुना छोड़ दिया…
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कमबख्त लफ्जों ने खूबसूरत होना छोड़ दिया…
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मेरे प्यार का बस एक ही किस्सा है
बेशक ओ मुझसे आज दुर है
फिर भी मेरी जिंदगी का एक खास हिस्सा है
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दिल ही उदास है
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बाकी सब कुछ ठीक है! !!
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#तरस जाओगे हमारे लबों से सुनने को एक लफ्ज भी
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प्यार की बात तो क्या हम शिकायत तक नहीं करेंगे…
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कोई सुलह‬ करा दे जिदंगी की उलझनों‬ से
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बड़ी ‪तलब‬ लगी है आज मुस्कुराने‬ की
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अदब सीखना है तो कलम से सीखिये
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जब भी चलती है सिर झुका के चलती है
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वो खार खार हैं शाख ए गुलाब का मानिंद
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मैं जख्म जख्म हूं फिर भी गले लगाऊं उसे!!!
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तुम्हें भी देख के हम जिंदगी के सेहरा में
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खिले हुए हैं किसी जख्म ए आरजू की तरह!!!
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हमने खुद से भी छुपाया और सारे शहर से भी
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मगर तेरे जाने की खबर दीवार ओ दर करते रहे!!!
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हम सना मंजिलें पा ही लेते अगर
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हमसफर राह गुजर से जो डरता नहीं!!!
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हमने इश्क गुनाह से बेहतर जाना था
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इस दिल पर ये पहला पत्थर अफसोस का है!!!
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मैं ही हूँ चारों तरफ़ कोई ना था इस सेहरा में,
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वो तो मेरे ही निशाँ थे,जो लगे मुझे काफ़िले
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वादिए-उल्फत में देखी हमने कब मंजिल की शक्ल,
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गिर पड़े, गिरकर उठे, उठकर संभलते ही रहे
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सारे जहाँ की धूप मेरे सर पे आ पड़ी,
मुझ पर किसी दरख़्त का साया था, कट गया
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काँटा समझ के मुझसे न दामन बचाइए,
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गुजरी हुई बहार की इक यादगार हूँ
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हम खुद तराशते हैं मंजिल के संग ए राह
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हम वो नहीं जिनको जमाना बना गया!!!
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होती नहीं कुबूल दुआ तर्क ए इश्क की
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दिल चाहता न हो तो जुबां में असर कहां!!!
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हम तो मुखलिस हैं और बे गर्ज हैं ऐसे
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के चोट खाएंगे तुझसे और देंगे तुझे ही दुआ!!!
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याद पड़ता है के खुश ख्वाब थे धुंधले धुंधले
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वो अमानत मैं कहीं भूल गया हूं रख के!!!
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ये कैसे शिकारी ने जकड़ा है मुझको
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के खुद मैंने उड़ने की ख्वाहिश तर्क कर दी!!!
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याद रखना प्यार अपना ए बिछड़ने वाले
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खून ए दिल से हम तुझे रंग ए हिना देते रहे!!!
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ये रिश्ता ए खुदा है टूटेगा किस तरह
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रुहों को छू सकते हैं भला कब फना के हाथ!!!
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ऐ हासिले-मोहब्बत बता क्या जवाब दूँ,
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दुनिया यह पूछती है कि मैं क्यों उदास हूँ
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#कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता
जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है ज़ुबाँ मिली है मगर हमज़ुबाँ नहीं मिलता
बुझा सका है भला कौन वक्त के शोले ये ऐसी आग है जिस में धुआँ नहीं मिलता
#तेरे जहान में ऐसा नहीं के प्यार न हो जहाँ उम्मीद हो इसकी वहाँ नहीं मिलता
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ये मिजाज है अपना किसी का दिल न दुखे
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जुदाईयों को भी चाहा है कुरबतों की तरह!!!
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यादों की आग थी के ख्यालों की चांदनी
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शब भर मेरे मकान में इक रोशनी थी!!!
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यूं किस तरह कटेगा कड़ी धूप का सफर
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सर पर ख्याल ए यार की चादर ही ले लें!!!
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पुरसाने-हाल रख…
दिल  में  मलाल  रख  न  ज़ेहन  में  सवाल  रख
अल्फ़ाज़  में  उमीद  कहन  में  कमाल  रख
तन्हा  न  सह  सकेगा  शबे-तार  की  घुटन
अपने  क़रीब  कोई  तो  पुरसाने-हाल  रख
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ये फूल अपनी लताफत की दाद पा न सका
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खिला जरुर मगर खिल कर मुस्कुरा न सका!!!
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याद आती है जो मरहूम तमन्नाओं की
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भूल जाता हूं के महरुम तमन्ना हूं मैं!!!
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शे’र  कहना  कहीं  गुनाह  नहीं
फिर  हमें  भी  तो  कोई  राह  नहीं
ले  गए  जान  वो  निगाहों  से
पर  कोई  क़त्ल  का  गवाह  नहीं
तंज़  यह  सोच  कर  करें  हम  पर
आप  क्या  इश्क़  में  तबाह  नहीं
हैं  यहां  बेचवाल  भी  दिल  के
ताजिरों  से  मेरा  निबाह  नहीं
तेग़  में  ज़ोर  है  तो  आ  जाएं
.खूं  हमारा  कभी  सियाह  नहीं
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याद करते नहीं इतना तो दिल ए खाना खराब
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भूला भटका कोई दो रोज अगर ठहरा!!!
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ये इत्तेफाक है सब राह के मुसाफिरों के साथ
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चले किसी के लिए जा मिले किसी के साथ!!!
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चले  जाते  मगर  पहले  बता  देते  तो  अच्छा  था
रुसूमे-तर्के-दिलदारी  निभा  देते  तो  अच्छा  था
हुई  गर  आपसे  वादा-फ़रामोशी  शरारत  में
कोई  मुमकिन  बहाना  भी  बना  देते  तो अच्छा  था
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‘उठाने  को  उठा  लेंगे  अकेले  बार  हम  दिल  का
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ज़रा-सा  हाथ  गर  तुम  भी  लगा  देते  तो  अच्छा  था !’
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यही है न तुम्हें मुझसे बिछड़ जाने की जल्दी है
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कभी मिलो तो सही तुम्हारे मसले का हल निकालेंगे!!!
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ये तेरी याद है या मेरी कत्लगाह
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इक नश्तर सा रग ए जान के करीब आज भी है!!!
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जीना  पड़ा  तो  दर्द  जबीं  पर  उभर  गए
ख़ुद्दार  ख़्वाब  टूट  ज़मीं  पर  बिखर  गए
मुश्किल  में  है  ज़मीर  तो  ईमान  दांव  पर
कुछ  बेहया  दरख़्त  जड़ों  से  उखड़  गए
जब-जब  किसी  ग़रीब  के  दिल  से  उठी  है  आह
वो  ज़लज़ले  हुए  कि  ज़माने  सिहर  गए  !
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ये अजनबी सी मंजिलें और रफ्तागां की याद
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तन्हाईयों का जहर है और हम हैं!!!
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ये और बात है साकी के मुझे होश नहीं
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वरना मैं कुछ भी हूं मगर एहसान फरामोश नहीं!!!
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मंज़िलों  की  बात  छोड़ो ,  किस  ने  पाईं  मंज़िलें,
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एक सफ़र अच्छा लगा, एक हमसफ़र अच्छा लगा.
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भूल सी भूल है एहसान वो फरमाते हैं
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हां कहीं आपको देखा है मगर याद नहीं!!!
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यूं तो मैं हंस पड़ा हूं तुम्हारे लिए मगर
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सितारे टूट पड़े इक हंसी के साथ!!!
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हर्फ ए तसल्ली तो इक तकल्लुफ है बस
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जिसका दर्द उसी का दर्द बाकी सब तमाशे हैं!!!
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दाम ऊंचे हो सकते हैं, ख़्वाहिशों के…..
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मगर ख़ुशियां, हरगिज़ महंगी नही होती
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बहुत दिनों में मुहब्बत को ये हुआ मालूम
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जो तेरे हिज्र में गुजरी वो रात रात हुई!!!
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खुदा के पास देने के तो हजार तरीके है,
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माँगने वाले देख की तुझमें कितने सलीके है !!
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कहीं धब्बा न लग जाये तेरी रहमत पर ए ख़ुदा
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हमे भी देख मुद्दत से तेरी इबादत में  है
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इश्क़ में सच्चा था वो मेरी तरह,
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बेवफ़ा  तो  आज़माने  से  हुआ
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अब  कौन  से  मौसम से कोई आस लगाए?
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बरसात में भी याद न जब उन को हम आए
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कुछ तो मिल जाये लबे-शीरीं से,
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जहर खाने की इजाजत ही सही
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कैसे कह दूँ कि थक गया हूँ मैं…
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जाने किस-किस का हौसला हूँ मैं.!
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ख़मोशी ओढ  ली  मजबूर  हो के  हमने  भी
कि इस लिबास से बेहतर कोई लिबास न था …
मेरी  निगाह  ने  क्या  क्या  फ़रेब  खाए  हैं
मैं जिसको ख़ास समझता था वो भी ख़ास न था …
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न जाने कितनी थकानों के बाद निकले हैं।
ये रास्ते जो ढलानों के बाद निकले हैं।।
हमें नमाज़ की अज़मत बताने वाले लोग।
हमेशा घर से अज़ानों के बाद निकले हैं।।
किसी ने अर्श को पहले ही नाप डाला है।
तुम्हारे पर तो ज़मानों के बाद निकले हैं।।
अधूरे ख्वाब की ताबीर भी अधूरी थी।
तमाम सांप ख़ज़ानों के बाद निकले हैं।।
तुम्हारी बज़्म से उठने का दिल नहीं करता।
कभी कभी तो दीवानों के बाद निकले हैं।।
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जिस्म का बोझ मुहब्बत में जरुरी तो नहीं
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रुह बनकर कभी अपने अंदर से निकलकर देखो!!!
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जो नज़र की इल्तिज़ा समझा नहीं,
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हाथ उसके सामने फैलायें क्या?
 


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