शराबी शायरी, शराबी की शायरी और स्टेटस/sarabi ke shayari and stauts
रहता तो नशा तेरी यादों का ही है,
कोई पूछे तो कह देता हूँ, पी रखी है।
मयखाने से बढ़कर कोई जमीन नहीं,
जहां सिर्फ कदम लड़खड़ाते है जमीर नहीं।
बात सज़दों की नहीं नीयत की है,
मयखाने में हर कोई शराबी नहीं होता।
एक पल में ले गई मेरे सारे ग़म खरीद कर,
कितनी अमीर होती है ये बोतल शराब की।
असर न पूछिए साकी की मस्त आँखों का,
ये देखिये कि कोई होशमंद बाकी है?
कभी उलझ पड़े खुदा से कभी साक़ी से हंगामा,
ना नमाज अदा हो सकी ना शराब पी सके।
मेरी तबाही का इल्जाम अब शराब पर है,
करता भी क्या और तुम पर जो आ रही थी बात।
अगर ग़म मोहब्बत पे हाबी न होता,
खुदा की कसम मैं शराबी न होता।
खरीदा जा नहीं सकता है साक़ी ज़र्फ़ रिंदों का,
बहुत शीशे पिघलते हैं तो एक पैमाना बनता है।
मत पूछ उसके मैखाने का पता ऐ साकी,
उसके शहर का तो पानी भी नशा देता है।
तुम्हारी आँखों की तौहीन है,
ज़रा सोचो तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है।
उनकी आंखें यह कहती रहती हैं,
लोग नाहक शराब पीते हैं।
उन्हीं के हिस्से में आती है ये प्यास अक्सर,
जो दूसरों को पिलाकर शराब पीते हैं।
शराब पीने से काफ़िर हुआ मैं क्यूं,
क्या डेढ़ चुल्लू पानी में ईमान बह गया।
बे पिए ही शराब से नफ़रत,
ये जहालत नही तो और क्या है?
झूठ कहते हैं लोग कि शराब ग़मों को हल्का कर देती है,
मैंने अक्सर देखा है लोगों को नशे में रोते हुए।
हर जाम पी गया मैं ऐ दर्दे-जिंदगानी,
फिर भी बड़ा तरसा हूं कुछ और शराब दे दो।
एक शराब की बोतल दबोच रखी है,
तुझे भुलाने की तरकीब सोच रखी है।
हम तो बदनाम हुए कुछ इस कदर दोस्तों,
की पानी भी पियें तो लोग शराब कहते हैं।
मुझे ऐसी शराब बता ऐ दोस्त,
नशा-ए-इश्क उतार पाऊ मै।
मयखाने से पूछा आज इतना सन्नाटा क्यों है,
बोला, साहब लहू का दौर है शराब कौन पीता है।
शिकन न डाल माथे पर शराब देते हुए,
ये मुस्कुराती हुई चीज़ मुस्कुरा के पिला।

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