दिल पर भी सैनिटाइजर छिड़कते Hindi shayari
आज भी बह पढ़ते हैं अश्क सिर्फ यह सोचकर… कि क्या तुझसे इश्क होना जरूरी था काश मेरी याद में तुम कुछ ऐसे उलझ जाओ, यहां मैं तुम्हारे बारे में सोच और वहां तुम समझ जाओ। दिल पर भी सैनिटाइजर छिड़कते रहिए यह इश्क बड़ी संक्रामक बीमारी है। मुझसे ज्यादा तुझे मेरी आंखें चाहती हैं, जब भी तुझे सोचता हूं तो यह भर आती हैं। कभी यह मत सोचना कि याद नहीं करते, हम रात की आखरी और सुबह की पहली सोच हो तुम। कितनी हसीन हो जाती है उस वक़्त दुनिया, जब अपना कोई कहता है याद आ रहे हो। मत पूछो कैसे गुजरता है हर पल तुम्हारे बिना, कभी बात करने की हसरत कभी देखने की तमन्ना! अगर कभी वक़्त मिले तो महसूस कर लेना तुम मुझे कुछ तन्हाइयां… तेरे हिस्से में भी छोड़ आई हूँ! सितम हमारे सारे छांट लिया करो.. नाराजगी से अच्छा थोड़ा डांट लिया करो। खामोशी भी अब रास आ गई है.. ज़िन्दगी इसी बहाने पास आ गई है..!! ये इनायते गजब की, ये बला की मेहरबानी… मेरी खैरियत भी पूछी किसी और की ज़बान...